बुदबुदाते, खामोश और रेंगते लोगों के बीच
जब मैं अपने आप को देखता हूँ तो
मेरे होंठ भी प्रार्थना मैं बुदबुदाने लगते हैं
और रेंगने लगती है घृणा मेरे दिमाग में ,
मैं भी उनकी तरह खामोश हो जाता हूँ
और मर जाता है मेरे अंदर बोलता,
चिल्लाता चीखता इनसान मर जाता है