Tuesday, May 22, 2012

???

राह बदल गयी मेरे मुल्क की
हवा बदल गयी मेरे मुल्क की ........
अब लहू रगों में सर्द हो गया
बाजुओ का जोर खत्म हो गया
हर तरफ बाजार का सा शोर है
आदमी का भाव कमजोर है
नींद टूटती नहीं है खल्क की..........
राह बदल गयी मेरे मुल्क की
दिल दिमाग इश्क के बुखार में
देह का जुलुस है जवानियाँ
सुन के भी खून खौलता नहीं
जुल्म की बेंइन्तहा कहानियां
नीयतें खराब शाहे तख्त की ...

Sunday, May 20, 2012

एक लंबी चुप्पी के बाद !

एक लंबी चुप्पी के बाद ...
कितना अच्छा लगता है बोलना
जैसे दोपहर भर उमस के बाद शाम की बारिश ,
या लंबी सर्द रात के बाद गुनगुनी धूप
कभी महसूस करना
किसी के न होने के बाद
 उसके होने का अहसास ......