Friday, February 24, 2012

ऐसा क्यूँ होता है ??

हर   बार  ऐसा  क्यूँ  होता  है  कि
 मुझे  सब  से  शिकायत  होती  है
 और  मैं  खुद  पे शर्मिंदा  हो  जाता  हूँ
 

Wednesday, February 22, 2012

हारा नहीं हूँ मैं

थका हूँ, अशांत हूँ,
हारा नहीं हूँ मैं॥
युद्ध में रत हूँ
हारा नहीं हूँ मैं
सूर्य के अवसान पे उदित हो
जो,भोर का तारा नहीं हूँ मैं
रोको अभी कुछ क्षण बाँध लूँ कटिबन्ध
शेष हूँ अभी
ये सारा नहीं हूँ मैं ...
हारा नहीं हूँ मैं
हारा नहीं हूँ मैं

Tuesday, February 21, 2012

खुद ही ख़तम हुआ हूँ मैं
तुम क्या हो जो ख़तम करोगे

एक और सपना है बाकी
कितने सपने क़त्ल करोगे

दबी हुई है ये चिंगारी
आग को कैसे दफ़्न करोगे

जाओ अपना काम करो तुम
देखेंगे क्या सितम करोगे
नैतिक और अनैतिक ,
 सही और गलत ,
सच और झूठ,
स्याह परदे है कई
और उनके पीछे
एक मैं हूँ और
 एक तू है