उन दुखों का चिटठा जो रहन हैं मेरे माजी के पास और उन सुखों की किताबत जो मेरे वजूद से पैदा हुए हैं
Wednesday, February 22, 2012
हारा नहीं हूँ मैं
थका हूँ, अशांत हूँ, हारा नहीं हूँ मैं॥ युद्ध में रत हूँ हारा नहीं हूँ मैं सूर्य के अवसान पे उदित हो जो,भोर का तारा नहीं हूँ मैं रोको अभी कुछ क्षण बाँध लूँ कटिबन्ध शेष हूँ अभी ये सारा नहीं हूँ मैं ... हारा नहीं हूँ मैं हारा नहीं हूँ मैं
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