Tuesday, February 21, 2012

खुद ही ख़तम हुआ हूँ मैं
तुम क्या हो जो ख़तम करोगे

एक और सपना है बाकी
कितने सपने क़त्ल करोगे

दबी हुई है ये चिंगारी
आग को कैसे दफ़्न करोगे

जाओ अपना काम करो तुम
देखेंगे क्या सितम करोगे

No comments:

Post a Comment