उन दुखों का चिटठा जो रहन हैं मेरे माजी के पास और उन सुखों की किताबत जो मेरे वजूद से पैदा हुए हैं
Monday, March 12, 2012
मौन क्यूँ हो?
मौन क्यूँ हो?
जाओ इतिहास जगाओ
चल रहे हो
चाक से
तुम निरंतर
किन्तु बन्ध्या स्त्री सी गति क्यूँ है तुम्हारी
गति में तुम सृजन लाओ
खेत के किनारे खड़े पेड़ से तुम
मौन क्यूँ हो?
bhai bahut sundar....
ReplyDeleteविजय भाई अच्छा लिखा है / और भी बेहतरीन रचनाओं के इंतज़ार में .
ReplyDeletemaun....chuppi....khamoshi.....samajh saka na koi
ReplyDeletehum ka jaane hoth ki bhasa....man ko padhe na koi