Monday, March 12, 2012

मौन क्यूँ हो?

मौन क्यूँ  हो?
जाओ इतिहास  जगाओ
चल रहे हो
चाक से
तुम निरंतर
किन्तु बन्ध्या स्त्री सी गति क्यूँ है तुम्हारी
गति में तुम  सृजन लाओ
खेत के किनारे खड़े पेड़ से तुम
 मौन क्यूँ  हो?

3 comments:

  1. विजय भाई अच्छा लिखा है / और भी बेहतरीन रचनाओं के इंतज़ार में .

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  2. maun....chuppi....khamoshi.....samajh saka na koi
    hum ka jaane hoth ki bhasa....man ko padhe na koi

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