Sunday, April 21, 2013


ये किस वक्त में हैं हम.
ना यहाँ नायक ही हैं कोई
ना यहाँ कोई मसीहा
ना कोई रास्ता बचा है हमारे लिए
ना कोई मंजिल अनछुई
ये किस वक्त में हम ?
साथी हैं मेरे जो
मुझसे आगे हैं 
जो पीछे है
उनसे मैं बात नहीं करता
पता नहीं कौन कहाँ है
ये किस वक्त में हैं हम?
अंधा सूरज
फेंक रहा है काली धूप
हवा गला घोंटती है मेरा
ये किस वक्त मैं हैं हम?
हर एक रास्ता
दोराहे पे जाकर क्यूँ खुलता है?
हर एक मील के पत्थर पर क्यूँ
लिखा है शून्य!
ये किस वक्त में है हम?

ना कोई खुदी  है ना खुदा परस्त
फिर भी कुछ लोग खुद को
खुदा मानते है
ये किस वक्त में में हम?
मेरे दोस्त !
ये किस वक्त में हैं हम?

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