मौन क्यूँ हो?
जाओ इतिहास जगाओ
चल रहे हो
चाक से
तुम निरंतर
किन्तु बन्ध्या स्त्री सी गति क्यूँ है तुम्हारी
गति में तुम सृजन लाओ
खेत के किनारे खड़े पेड़ से तुम
मौन क्यूँ हो?
उन दुखों का चिटठा जो रहन हैं मेरे माजी के पास और उन सुखों की किताबत जो मेरे वजूद से पैदा हुए हैं
Monday, March 12, 2012
मौन क्यूँ हो?
मौन क्यूँ हो?
जाओ इतिहास जगाओ
चल रहे हो
चाक से
तुम निरंतर
किन्तु बन्ध्या स्त्री सी गति क्यूँ है तुम्हारी
गति में तुम सृजन लाओ
खेत के किनारे खड़े पेड़ से तुम
मौन क्यूँ हो?
जाओ इतिहास जगाओ
चल रहे हो
चाक से
तुम निरंतर
किन्तु बन्ध्या स्त्री सी गति क्यूँ है तुम्हारी
गति में तुम सृजन लाओ
खेत के किनारे खड़े पेड़ से तुम
मौन क्यूँ हो?
Friday, February 24, 2012
Wednesday, February 22, 2012
हारा नहीं हूँ मैं
थका हूँ, अशांत हूँ,
हारा नहीं हूँ मैं॥
युद्ध में रत हूँ
हारा नहीं हूँ मैं
सूर्य के अवसान पे उदित हो
जो,भोर का तारा नहीं हूँ मैं
रोको अभी कुछ क्षण बाँध लूँ कटिबन्ध
शेष हूँ अभी
ये सारा नहीं हूँ मैं ...
हारा नहीं हूँ मैं
हारा नहीं हूँ मैं
हारा नहीं हूँ मैं॥
युद्ध में रत हूँ
हारा नहीं हूँ मैं
सूर्य के अवसान पे उदित हो
जो,भोर का तारा नहीं हूँ मैं
रोको अभी कुछ क्षण बाँध लूँ कटिबन्ध
शेष हूँ अभी
ये सारा नहीं हूँ मैं ...
हारा नहीं हूँ मैं
हारा नहीं हूँ मैं
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