Tuesday, May 22, 2012

???

राह बदल गयी मेरे मुल्क की
हवा बदल गयी मेरे मुल्क की ........
अब लहू रगों में सर्द हो गया
बाजुओ का जोर खत्म हो गया
हर तरफ बाजार का सा शोर है
आदमी का भाव कमजोर है
नींद टूटती नहीं है खल्क की..........
राह बदल गयी मेरे मुल्क की
दिल दिमाग इश्क के बुखार में
देह का जुलुस है जवानियाँ
सुन के भी खून खौलता नहीं
जुल्म की बेंइन्तहा कहानियां
नीयतें खराब शाहे तख्त की ...

Sunday, May 20, 2012

एक लंबी चुप्पी के बाद !

एक लंबी चुप्पी के बाद ...
कितना अच्छा लगता है बोलना
जैसे दोपहर भर उमस के बाद शाम की बारिश ,
या लंबी सर्द रात के बाद गुनगुनी धूप
कभी महसूस करना
किसी के न होने के बाद
 उसके होने का अहसास ......

Monday, April 30, 2012

जब तय था...

तय था तो क्यूँ रखा मुझे प्रथम पंक्ति में
जब हाशिए पे लाना था तो ?
अगर तुम चाहते थे तो क्यूँ
आगे रखा मुझे सिर्फ दरी उठाने को
मेरी आवाज़ सुनाई नहीं देती  मुझे अब
इतना चीखा मैं तुम्हारे लिए....

Monday, March 12, 2012

मौन क्यूँ हो?

मौन क्यूँ  हो?
जाओ इतिहास  जगाओ
चल रहे हो
चाक से
तुम निरंतर
किन्तु बन्ध्या स्त्री सी गति क्यूँ है तुम्हारी
गति में तुम  सृजन लाओ
खेत के किनारे खड़े पेड़ से तुम
 मौन क्यूँ  हो?

मौन क्यूँ हो?

मौन क्यूँ  हो?
जाओ इतिहास  जगाओ
चल रहे हो
चाक से
तुम निरंतर
किन्तु बन्ध्या स्त्री सी गति क्यूँ है तुम्हारी
गति में तुम  सृजन लाओ
खेत के किनारे खड़े पेड़ से तुम
 मौन क्यूँ  हो?

Friday, February 24, 2012

ऐसा क्यूँ होता है ??

हर   बार  ऐसा  क्यूँ  होता  है  कि
 मुझे  सब  से  शिकायत  होती  है
 और  मैं  खुद  पे शर्मिंदा  हो  जाता  हूँ
 

Wednesday, February 22, 2012

हारा नहीं हूँ मैं

थका हूँ, अशांत हूँ,
हारा नहीं हूँ मैं॥
युद्ध में रत हूँ
हारा नहीं हूँ मैं
सूर्य के अवसान पे उदित हो
जो,भोर का तारा नहीं हूँ मैं
रोको अभी कुछ क्षण बाँध लूँ कटिबन्ध
शेष हूँ अभी
ये सारा नहीं हूँ मैं ...
हारा नहीं हूँ मैं
हारा नहीं हूँ मैं

Tuesday, February 21, 2012

खुद ही ख़तम हुआ हूँ मैं
तुम क्या हो जो ख़तम करोगे

एक और सपना है बाकी
कितने सपने क़त्ल करोगे

दबी हुई है ये चिंगारी
आग को कैसे दफ़्न करोगे

जाओ अपना काम करो तुम
देखेंगे क्या सितम करोगे
नैतिक और अनैतिक ,
 सही और गलत ,
सच और झूठ,
स्याह परदे है कई
और उनके पीछे
एक मैं हूँ और
 एक तू है